गुरुवार, 7 दिसंबर 2006

शिबू सोरेन:संघे शक्ति कलियुगे



आजकल राँची में राजनीति गर्म है। गुरुजी को कल ही अदालत से आजीवन कारावास की सजा हुई। बेवकूफ जज को कहाँ पता था गुरुजी की महानता के बारे में, सी बी आई वाले तो ऐसे ही झूठी कहानीयाँ गढते रहते हैं। कई बार यह सब सिद्ध भी हो चुका है। चाहे हवाला हो या चारा घोटाला, बोफोर्स हो या बाराक, इतिहास गवाह है कि सी बी आई के आरोप मनगढन्त होते हैं। बेचारे गुरुजी को अंग्रेजी बोलना नहीं आता और पिछडे क्षेत्र से हैं इसलिये फंसा दिये गये। अब सेंधरा(धर्मयुद्ध) की तैयारी है, पर झामुमो वालों के बन्द पर कोर्ट ने पाबन्दी लगा दी है। अब आजकल ये काले कोट वाले लोग कुछ ज्यादा ही उछल रहे हैं, माननीय खादीवालों की परेशानियाँ बढ गयी हैं।
अगर ऐसे हालात जारी रहे तो देश के कर्णधारों का क्या होगा। जब केन्द्र सरकार के कैबिनेट मन्त्री फंस गये तो छोटे मोटे भैयालालों का क्या ठिकाना। नेता बिरादरी के लिये यह नयी चुनौती है, राजनीतिक दलों को दलगत स्वार्थ से उपर उठ कर माननीय समुदाय की रक्षा के लिये कदम उठाने होंगे। मजाक है क्या, आज गुरुजी को फंसाया गया है, कल कोई और होगा, आखिर सार्वजनिक जीवन में पुण्यकर्म तो सभी को करने पडते हैं। गुरुजी ने जो किया, वो तो माननीयों के हित में ही था। चुनाव जीत कर गुरुजी लोकसभा पहुँचे थे, राव साहब की सरकार उनकी सहृदयता से बची थी, फिर झाजी कौन होते थे हिस्सा बँटाने वाले। यह सिद्धान्तों का प्रश्न था।
आज अखबार में गुरुजी के पार्टी के एक बडे नेता की अपील पढ के मेरा मन भर आया। नेताजी का कहना था कि, जब लालूजी चारा घोटाले में जेल गये थे तो गुरुजी ने उनका सहयोग किया था और उनकी सरकार को समर्थन दिया था। नैतिक आधार पर राजद को भी गुरुजी का समर्थन करना चाहिये, लेकिन लालू ने तो धोखा दे दिया और गुरुजी से इस्तिफे की माँग कर दी। राम, राम, राम क्या होगा देश का अगर नेता लोग ही ऐसा अनैतिक और अवसरवादी आचरण करने लगें। आखिर सबको एक दूसरे के समर्थन की जरुरत पड सकती है। संकट की इस घडी में कई लोग गुरुजी से सहानुभुति दिखाने लगे हैं। कल तक विरोधी रहे मरांडी साहब अब आंसू टपका रहे हैं। अर्जुन मुन्डा अभी पानी का अंदाजा ले रहे हैं। कुछ दिन पहले जब सामुहिक नरसंहार के एक मामले में गुरुजी को जेल हुई थी तो काँग्रेस वाले साथ थे, अभी उतनी तत्परता नहीं दिख रही।
जो भी हो नेता बिरादरी को एक साथ मिलकर इस सबसे निपटना होगा, वैसे ही एकजुटता दिखानी होगी जैसी लाभदायक पद वाले बिल पर, आरक्षण पर और सांसदों का वेतन बढाने के मसले पर दिखी थी।

3 टिप्‍पणियां:

Pratik ने कहा…

हिन्दी ब्लॉग जगत् में आपका हार्दिक स्वागत् है। उम्मीद है कि आप इसी तरह निरन्तर लेखन करते रहेंगे। आपका ब्लॉग HindiBlogs.com में सम्मिलित कर लिया गया है।

उन्मुक्त ने कहा…

हिन्दी चिट्ठे जगत में स्वागत है।

Shrish ने कहा…

यद्यपि यह काफी लेट है, लेकिन अभी 'परिचर्चा' से आपके चिट्ठे की खबर लगी।

मेरी तरफ से भी हार्दिक स्वागत चिट्ठाजगत में।